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25th January 2026

INDIAN EDU SYSTEM

कुपोषित व्यवस्था और मुरझाता मार्गदर्शक

कुपोषित व्यवस्था और मुरझाता मार्गदर्शक

कुपोषित व्यवस्था और मुरझाता मार्गदर्शक Abhshek Patni उम्मीद की किरण कारोबारी दुनिया का दायरा उम्मीद से कहीं ज़्यादा बड़ा और सक्रिय है। हर गुज़रते दिन से साथ विस्तार और व्यवसायीकरण ने तमाम मानदंड को ध्वस्त कर दिया है। व्यापार यानी मुनाफा, मुनाफा वो भी असीमित। आदमी के अंदर की लालच को व्यवसायीकरण ने मूर्त रूप दे दिया है। शिक्षा जैसा अतिसंवेदनशील क्षेत्र भी इसके पराकाष्ठा को जीने को बाध्य है। शिक्षा का निजीकरण और व्यवसायीकरण, मुनाफे का तड़का, मतलब बेजोड़ ज़ायका। ऐसे में एक ख़बर आती है, आई आई टी मुम्बई को एक पूर्ववर्ती छात्र ने अनुसंधान के लिए कई…
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